meer taqi meer shayari in hindi

‘mir’ amdan bhi koi marta hai
jaan hai to jahan hai pyare
ab kar ke faramosh to nashad karoge
par ham jo na honge to bahut yaad karoge
nahaq ham majburon par ye tohmat hai mukhtari ki
chahte hain so aap karen hain ham ko abas badnam kiya
meer ki shayari

be-khudi le gai kahan ham ko
der se intizar hai apna
mire saliqe se meri nibhi mohabbat men
tamam umr main nakamiyon se kaam liya
jab ki pahlu se yaar uthta hai
dard be-ikhtiyar uuthta hai
meer taqi meer urdu shayari
पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा हाल हमारा जाने है
जाने न जाने गुल ही न जाने, बाग़ तो सारा जाने है
आगे उस मुतक़ब्बर के हम ख़ुदा ख़ुदा किया करते हैं
कब मौजूद ख़ुदा को वो मग़रूर ख़ुद-आरा जाने है
आशिक़ सा तो सादा कोई और न होगा दुनिया में
जी के ज़िआं को इश्क़ में उस के अपना वारा जाने है
चारागरी बीमारी-ए-दिल की रस्म-ए-शहर-ए-हुस्न नहीं
वर्ना दिलबर-ए-नादां भी इस दर्द का चारा जाने है
क्या क्या फ़ितने सर पर उसके लाता है माशूक़ अपना
जिस बेदिल बेताब-ओ-तवाँ को इश्क़ का मारा जाने है
आशिक़ तो मुर्दा है हमेशा जी उठता है देखे उसे
यार के आ जाने को यकायक उम्र दो बारा जाने है
shayari meer taqi meer
अपने तड़पने की मैं तदबीर पहले कर लूँ
तब फ़िक्र मैं करूँगा ज़ख़्मों को भी रफू का।
यह ऐश के नहीं हैं या रंग और कुछ है
हर गुल है इस चमन में साग़र भरा लहू का।
बुलबुल ग़ज़ल सराई आगे हमारे मत कर
सब हमसे सीखते हैं, अंदाज़ गुफ़्तगू का।

अश्क आंखों में कब नहीं आता
लहू आता है जब नहीं आता।
होश जाता नहीं रहा लेकिन
जब वो आता है तब नहीं आता।
दिल से रुखसत हुई कोई ख्वाहिश
गिरिया कुछ बे-सबब नहीं आता।
इश्क का हौसला है शर्त वरना
बात का किस को ढब नहीं आता।
जी में क्या-क्या है अपने ऐ हमदम
हर सुखन ता बा-लब नहीं आता।
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